रात की खामोशी में एक चीख

रात की खामोशी में एक चीख

मुंबई की घुटन भरी रात थी। मरीन ड्राइव पर हल्की ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन जुहू स्थित 'एमरल्ड एस्टेट्स' के फ्लैट नंबर 302 में गर्मी और बेचैनी छाई हुई थी। मिस्टर राजेश तलवार, एक नामी हीरा व्यापारी, अपने आलीशान अपार्टमेंट के लिविंग रूम में, एक महंगे ओरिएंटल कालीन पर औंधे मुंह पड़े थे। उनके ठीक ऊपर, एक विशाल झूमर की मंद रोशनी उनके निष्प्राण चेहरे पर पड़ रही थी।
घटना स्थल
सुबह 7 बजे, उनकी हाउसकीपर, शांता बाई ने चीखते हुए पुलिस को फोन किया। एसीपी अजय राठौर, अपने तेज दिमाग और बेबाक अंदाज़ के लिए जाने जाते थे, मौके पर पहुंचे। उनके साथ उनकी टीम थी, जिसमें फोरेंसिक विशेषज्ञ और सब-इंस्पेक्टर सोनल वर्मा भी थीं, जो अपने बारीक अवलोकन के लिए प्रसिद्ध थीं।
राजेश तलवार के सिर पर एक गहरा घाव था, जो किसी भारी चीज़ से किया गया था। कमरे में कोई जबरन घुसने के निशान नहीं थे। खिड़कियाँ बंद थीं, और दरवाज़ा अंदर से लॉक था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि महंगे फर्नीचर, प्राचीन वस्तुएं और आर्ट गैलरी से चुराई हुई पेंटिंग - सब कुछ जस का तस था। नकद और हीरे, जो राजेश की तिजोरी में होने चाहिए थे, वे भी सुरक्षित थे। यह एक लूट का मामला नहीं था।
"हत्यारा कोई ऐसा है जिसे राजेश जानते थे," एसीपी राठौर ने अपनी दाढ़ी खुजाते हुए कहा। "किसी करीबी ने ही उन्हें अंदर आने दिया।"
पहले संदिग्ध: मीरा तलवार
पहला नाम जो सामने आया, वह था राजेश की पत्नी, मीरा तलवार का। वह एक सोशलाइट थीं, जिन्हें अपनी पार्टियों और महंगे शौक के लिए जाना जाता था। सुबह वह पास के जिम में थीं, उनके पास एक पुख्ता अलीबी थी, लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सी उदासीनता थी, दुख की बजाय।
"मेरे पति की किससे दुश्मनी हो सकती है?" मीरा ने शांत स्वर में पूछा, लेकिन राठौर को उनकी आवाज़ में एक छिपी हुई राहत महसूस हुई। "वह एक सख्त आदमी थे, लेकिन कोई उन्हें मारेगा क्यों?"
पूछताछ में पता चला कि राजेश और मीरा के रिश्ते अच्छे नहीं थे। राजेश मीरा के फिजूल खर्ची से परेशान थे, और मीरा राजेश के नियंत्रित स्वभाव से ऊब चुकी थीं। कुछ हफ्तों पहले, उनके बीच संपत्ति को लेकर तीखी बहस भी हुई थी।
दूसरा संदिग्ध: राहुल शर्मा
अगला संदिग्ध राजेश का व्यापारिक पार्टनर, राहुल शर्मा था। राहुल और राजेश हाल ही में एक बड़े हीरे के सौदे को लेकर झगड़ रहे थे। राहुल को सौदे में बड़ा घाटा हुआ था, जबकि राजेश को बड़ा मुनाफ़ा। राहुल को उस रात शहर से बाहर होने का दावा था, लेकिन उसके मोबाइल लोकेशन डेटा ने कुछ और ही कहानी बयां की। उसका फोन घटनास्थल के पास कुछ घंटों के लिए सक्रिय था।
राहुल ने अपनी लोकेशन को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं दिया। "मैं एक क्लाइंट से मिलने गया था," उसने कहा, "लेकिन मैं उस रात राजेश के अपार्टमेंट के पास नहीं था।" उसकी आवाज़ में घबराहट साफ थी।
तीसरा संदिग्ध: डॉ. अनिल कपूर
फोरेंसिक रिपोर्ट में एक और सुराग मिला। राजेश के नाखून में एक छोटा सा रेशमी धागा फंसा हुआ था, जो किसी महंगे सिल्क के कुर्ते का लग रहा था। एसीपी राठौर को याद आया कि डॉ. अनिल कपूर, राजेश के पारिवारिक डॉक्टर और मीरा के करीबी दोस्त, अक्सर ऐसे कुर्ते पहनते थे। डॉ. कपूर की भी एक अलीबी थी - वह एक इमरजेंसी ऑपरेशन में थे - लेकिन राठौर को उन पर शक हुआ।
डॉ. कपूर एक शांत और संभ्रांत व्यक्ति थे, लेकिन उनकी आँखों में एक अनकही बात छिपी थी। "राजेश और मैं अच्छे दोस्त थे," उन्होंने कहा, "मैं उन्हें क्यों मारूंगा?" लेकिन उनकी आवाज़ में थोड़ी हिचकिचाहट थी।
सुलझती गुत्थी
जांच आगे बढ़ी। सोनल वर्मा ने एक और अजीब बात देखी। राजेश के स्टडी टेबल पर, एक खाली कॉफी मग पड़ा था। मग पर एक अजीब सा धब्बा था, जो कॉफी का नहीं था। फोरेंसिक टीम ने उसकी जांच की और पता चला कि वह 'अफीम' का एक अवशेष था।
एसीपी राठौर के दिमाग में तुरंत एक कनेक्शन बना। राजेश को नींद न आने की समस्या थी। वह अक्सर रात में कॉफी पीते थे। लेकिन अफीम?
उन्होंने डॉ. अनिल कपूर को फिर से बुलाया। "डॉक्टर," राठौर ने कहा, "राजेश को नींद न आने की दवा कौन देता था?"
डॉ. कपूर का चेहरा फीका पड़ गया। "मैं... मैं उन्हें कभी-कभी हल्की नींद की गोलियां देता था।"
"हल्की नींद की गोलियां, या अफीम?" राठौर ने सीधे सवाल किया। "हमें आपके घर से वही रेशमी कुर्ता मिला है, जिसका धागा राजेश के नाखून में था।"
डॉ. कपूर टूट गए। उन्होंने स्वीकार किया कि वह मीरा के साथ मिलकर राजेश को मारना चाहते थे। मीरा राजेश की संपत्ति हासिल करना चाहती थी, और डॉ. कपूर मीरा के साथ एक नया जीवन शुरू करना चाहते थे। उस रात, डॉ. कपूर ने राजेश की कॉफी में अफीम मिलाई थी, ताकि वह गहरी नींद में सो जाए। जब राजेश अचेत हो गए, तो डॉ. कपूर ने उनके सिर पर वार किया। मीरा ने उनसे कहा था कि सब कुछ लूट जैसा लगना चाहिए, लेकिन डॉ. कपूर ने घबराहट में कीमती सामान नहीं चुराया।

मीरा को जब यह पता चला कि डॉ. कपूर ने सब कुछ बता दिया है, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसे लगा था कि वह बच जाएगी, लेकिन राठौर और सोनल की टीम ने उनके हर झूठ को बेनकाब कर दिया था।
मुंबई की वो घुटन भरी रात, जिसमें एक अमीर व्यापारी की मौत हुई थी, अब सवालों के जवाबों से भर चुकी थी। रात की खामोशी में दबी वो चीख, अब न्याय की आवाज़ में बदल चुकी थी।
क्या आपको लगता है कि अपराध कभी छिप नहीं सकता?

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