पीएम मोदी द्वारा ट्रम्प का न्योता ठुकराने की खबरें


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संबंध हमेशा से चर्चा का विषय रहे हैं। हाल ही में दोनों नेताओं के बीच कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं:

हालिया बातचीत और मुलाकातें (जून 2025):

 * G-7 शिखर सम्मेलन और फोन कॉल: प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में कनाडा में G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने गए थे, जहां उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से द्विपक्षीय बैठक तय थी। हालांकि, ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण ट्रंप को जल्दबाजी में अमेरिका लौटना पड़ा, जिससे यह मुलाकात नहीं हो पाई।

 * ट्रंप का निमंत्रण: अमेरिका लौटते ही, ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया और उन्हें वाशिंगटन आने का न्योता दिया, जहां वे साथ में भोजन करने और बातचीत करने का आग्रह कर रहे थे।

 * पीएम मोदी द्वारा न्योता ठुकराना: पीएम मोदी ने ट्रंप के इस निमंत्रण को नम्रतापूर्वक मना कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके लिए "महाप्रभु की धरती" (ओडिशा) पर जाना बहुत जरूरी था, और इसलिए उन्होंने ओडिशा आना पसंद किया।


 * आतंकवाद और मध्यस्थता पर बात: फोन पर लगभग 35 मिनट चली बातचीत में पीएम मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने "ऑपरेशन सिंदूर" (भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव के संदर्भ में) पर विस्तार से बात की। यह भी बताया गया कि पीएम मोदी ने ट्रंप को साफ शब्दों में कहा कि भारत किसी भी सूरत में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता - न पहले की, न अब करता है और न ही भविष्य में ऐसा होगा। यह बयान ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के दावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

 * क्वाड और भारत यात्रा का निमंत्रण: दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और क्वाड की भूमिका पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को क्वाड की अगली बैठक के लिए भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे ट्रंप ने स्वीकार करते हुए भारत आने की उत्सुकता जताई।

पृष्ठभूमि और पूर्व की मुलाकातें:


डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में ट्रंप और मोदी के बीच कई मुलाकातें हुई हैं, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाती हैं। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल भी अक्सर सुर्खियों में रहा है।

कुल मिलाकर, हाल की बातचीत से पता चलता है कि भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत बने हुए हैं, लेकिन भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है, विशेष रूप से संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर जैसे कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता।


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